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एसपीए की विरासत

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एसपीए की विरासत

भारत स्वतंत्र होने के समय, आर्किटेक्चर और प्लानिंग पेशे अभी नए थे। पूरे देश में आर्किटेक्ट तैयार करने के लिए केवल दो स्कूल थे—एक बॉम्बे में और दूसरा बड़ौदा में। इसलिए प्रशिक्षित आर्किटेक्ट्स की बहुत कमी थी।

1947 से पहले, और द्वितीय विश्व युद्ध के समय, इंजीनियर और आर्किटेक्ट्स की अचानक ज़रूरत बढ़ गई। इसी दौरान वॉल्टर जॉर्ज और उनके सहयोगियों ने दिल्ली में आर्किटेक्चर की शिक्षा देने के लिए पहला संस्थान स्थापित करने का काम शुरू किया।

1941 में दिल्ली पॉलिटेक्निक (कश्मीरी गेट) में आर्किटेक्चर विभाग की स्थापना हुई। डब्ल्यू. डब्ल्यू. वुड पहले प्रिंसिपल बने, जबकि श्री मिर्ज़ा आर्किटेक्चर विभाग के पहले प्रमुख बने। 1950 में पहले बैच के छात्रों ने आर्किटेक्चर में राष्ट्रीय डिप्लोमा प्राप्त किया। ये युवा आर्किटेक्ट स्वतंत्र भारत के राष्ट्रनिर्माण की चुनौतियों का सामना करने को तैयार थे।

चंडीगढ़, जो पंजाब और बाद में हरियाणा की नई राजधानी बनी, देश में कई आर्किटेक्ट्स के प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र बन गया। 1950 के दशक की शुरुआत से देश के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। पहली पंचवर्षीय योजना में देश में प्लानिंग और आर्किटेक्चर स्कूल स्थापित करने की सिफारिश की गई।

1955 में भारत सरकार ने दिल्ली में पहला "स्कूल ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग" स्थापित किया। यह सात वर्षों तक कपूरथला हाउस (मान सिंह रोड) की किराए की इमारत में चला। संस्थापक निदेशक प्रो. मणिक्कम ने इंड्रप्रस्थ एस्टेट में स्कूल और ITPI मुख्यालय के लिए भूमि दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

26 मई 1958 को केंद्रीय मंत्री प्रो. हुमायूँ कबीर ने प्लानिंग कैंपस की आधारशिला रखी।

1959 में स्कूल का नाम बदलकर School of Planning and Architecture (SPA) रखा गया और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग स्कूल और आर्किटेक्चर विभाग दोनों को एक साथ मिला दिया गया। 1965 तक कश्मीरी गेट से आर्किटेक्चर विभाग का स्थानांतरण पूरा हुआ। आर्किटेक्चर कैंपस का डिज़ाइन भी प्रो. टी. जे. मणिक्कम ने तैयार किया।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा

दो दशकों के भीतर SPA देश का प्रमुख संस्थान बन गया। 1979 में भारत सरकार ने इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया, जिससे स्कूल को अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों का विस्तार करने का मौका मिला।

अगले वर्षों में स्कूल ने कई उपलब्धियाँ हासिल कीं:
• नए शैक्षणिक विभागों की स्थापना
• एडवांस्ड स्टडीज़ केंद्रों की स्थापना
• आवासीय कैंपस का निर्माण
• छात्रावास की सुविधाओं का विस्तार
• डॉक्टोरल (PhD) प्रोग्राम की शुरुआत
 

2015 में भारत सरकार ने संसद के अधिनियम के तहत SPA, नई दिल्ली को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया।

आज SPA, नई दिल्ली देश का शीर्ष संस्थान है, जो प्लानिंग, आर्किटेक्चर और डिज़ाइन में शिक्षा प्रदान करता है।