एकीकृत बी. प्लानिंग - एम. प्लानिंग
पाँच वर्षीय कार्यक्रम
देश में प्लानिंग और आर्किटेक्चर के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों में से एक, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली ने 1989 में देश का पहला बैचलर ऑफ प्लानिंग कार्यक्रम शुरू करने की पहल की थी। आज यह कार्यक्रम शिक्षा जगत और उद्योग दोनों में एक प्रमुख स्नातक पाठ्यक्रम के रूप में व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है।
प्लानिंग स्थानीय एवं राज्य सरकारों का एक महत्त्वपूर्ण कार्य है और यह अत्यंत गतिशील है। वैश्वीकरण, आर्थिक, शहरी और प्रशासनिक सुधार तथा ICT, AI, बिग डेटा जैसी तकनीकी प्रगति ने शहरों और क्षेत्रों की प्लानिंग एवं प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले सिद्धांतों, तरीकों और उपकरणों के दृष्टिकोण को बदल दिया है। वर्तमान सहस्राब्दी ने सतत एवं न्यायपूर्ण समुदायों, समाजों और बस्तियों के महत्व को पहले से कहीं अधिक स्पष्ट किया है। इन चुनौतियों ने योजनाकारों (planners) से अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील होने की अपेक्षा बढ़ा दी है, जिससे उनका कार्य और जटिल हो गया है।
पिछले तीन दशकों में यह कार्यक्रम वैश्विक और स्थानीय स्तर पर लगातार बदलते संदर्भों के अनुरूप काफी विकसित हुआ है। इसका विशेष ध्यान छात्रों को नवीनतम तकनीकी प्रवृत्तियों और उपकरणों से सुसज्जित करने पर रहा है।
यह चार वर्षीय पाठ्यक्रम छात्रों को भौतिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं के गहन अध्ययन एवं उनके आपसी संबंधों की समझ प्रदान करता है। यह आठ सेमेस्टर में विभाजित है, जिसमें शामिल हैं:
• 8 स्टूडियो और फील्ड-आधारित अभ्यास
• लगभग 40 सिद्धांत विषय (विभिन्न विषयों से)
• 6-6 सप्ताह की दो इंटर्नशिप
• स्वतंत्र शोध कार्य (आठवें सेमेस्टर में)
स्टूडियो प्रशिक्षण छात्रों को डेटा संग्रहण, विश्लेषण, व्याख्या, मैपिंग तथा योजना सिद्धांतों एवं उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग की नींव प्रदान करता है। पाठ्यक्रम उन्हें टीमवर्क, समस्या-समाधान, दृश्य और मौखिक संचार जैसी पेशेवर क्षमताओं से भी सुसज्जित करता है।
कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य:
- जिस संदर्भ में प्लानिंग संचालित होती है, उसकी समझ विकसित करना।
- भूमि एवं उससे संबंधित नीतियों, आवंटन, कार्यान्वयन आदि पर केंद्रित सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण हेतु ज्ञान प्रदान करना।
- योजना संबंधी निर्णयों के दीर्घकालिक प्रभावों की समझ विकसित करना।
- विभिन्न परिस्थितियों में योजनाबद्ध विकास हेतु ज्ञान को व्यवहार में लागू करने की क्षमता विकसित करना।
- प्लानिंग में विविधता एवं परस्पर विरोधी हितों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना।
करियर संभावनाएँ: स्नातक के बाद छात्र टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अनुशासन में पूर्ण रूप से योग्य पेशेवर के रूप में मान्यता प्राप्त करते हैं।
• एक वर्ष का पेशेवर अनुभव पूरा करने के बाद छात्र इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स के एसोसिएट सदस्य बन सकते हैं।
• छात्र भारत एवं विदेश की विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में भी प्रवेश के पात्र होते हैं।
• संभावित विशेषज्ञता क्षेत्रों में शामिल हैं: अर्बन और रीजनल प्लानिंग, हाउसिंग, पर्यावरणीय प्लानिंग, ट्रांसपोर्ट प्लानिंग, अर्बन डिज़ाइन, आर्किटेक्चरल कंज़र्वेशन, GIS और विकास क्षेत्र की अन्य शाखाएँ।
• छात्र मैनेजमेंट, इंटरनेशनल डेवलपमेंट और पब्लिक पॉलिसी में भी करियर बना सकते हैं।
एकीकृत बी. प्लानिंग - एम. प्लानिंग (2019 से प्रारंभ)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, यह भारत का पहला एकीकृत कार्यक्रम है। इसमें अतिरिक्त एक वर्ष का अध्ययन जलवायु परिवर्तन, शहरी और क्षेत्रीय वित्त, सार्वजनिक नीति एवं सुशासन पर केंद्रित है।
• बी. प्लानिंग में पहले से दाख़िल छात्रों को सातवें सेमेस्टर के बाद इसमें शामिल होने का विकल्प मिलता है।
• कुल प्रवेश क्षमता 15 छात्रों की है।
• चयन निर्धारित प्रवेश मानदंडों के आधार पर किया जाता है।
• इस मार्ग को चुनने वाले छात्रों को इंटीग्रेटेड बी. प्लानिंग – एम. प्लानिंग की डिग्री प्रदान की जाती है।
अन्य कार्यक्रम:
विभाग डॉक्टोरल कार्यक्रम भी प्रदान करता है।
हमारे स्नातक:
हमारे छात्र सार्वजनिक, निजी एवं थर्ड सेक्टर संगठनों में कार्यरत हैं, जहाँ वे अर्बन और रीजनल प्लानिंग, हाउसिंग, ट्रांसपोर्टेशन, डिज़ाइन आदि क्षेत्रों में सेवाएँ प्रदान करते हैं।
• चूँकि प्लानिंग एक राज्य कार्य है, छात्रों को सरकारी क्षेत्र में भी अवसर मिलते हैं।
• कई छात्र संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, DFID, GIZ जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और विकास सहायता एजेंसियों में कार्यरत हैं।
• कुछ छात्रों ने उद्यमी बनकर अपनी सफल परामर्श (consulting) कंपनियाँ भी स्थापित की हैं।


